खुद की चिता जला दी है अब कुछ अरमानो के साथ में।
आखरी मंजिल मिलने तक ग़ालिब अब मैं नहीं मारूंगा||

"कोशिशों की जंग में अगर मैं खो दूं, ये नश्वर शरीर,
तो काली रात के अंधेरों में ही जलाना, मेरी चिता को,
मैं आखरी दम तक अंधेरों में दिए जलाना चाहता हूँ"

||दो अल्फाज कह देता हूँ तुजसे कि अब मैं कुछ कहूँगा नहीं।|
॥गर किा हो इश्क दिल से कभी तो, ख़ामोशी पढ़ लेना मेरी॥

एक दृश्य, टेहरी बाँध के नजदीक

यह बाँध गंगा नदी की प्रमुख सहयोगी नदी भागीरथी पर बनाया गया है। टिहरी बाँध की ऊँचाई २६१ मीटर है जो इसे विश्व का पाँचवा सबसे ऊँचा बाँध बनाती है।

Thursday, December 13, 2012

कहानी मेरी नयी जंग की



माना की ये जंग जो हमने छेड़ी है, पत्थर के उपर पेड़ उगाने की है,
लेकिन हमारे इरादों के तूफान, इसे थोड़ी मिट्टी जरूर देंगे।
रोपेंगे हम इसे, आपके समर्थन नुमा पानी से,
अगर फल ना भी मिल पायें तो क्या, चटकती धुप में छाँव तो लेंगे।

किसी ने हां कहा तो किसी ने ना कहा,
मेरी इस नयी जंग में हर किसी ने दिया बयां,
कोई कहता तू पहुँच जायेगा फलक तक,
तो किसी ने कहा मुन्ना, जमीन में सिमट जायेगा।

दिल और दिमाग में सुनामी सा कुछ आया है,
हाँ और ना दोनों ही टीमों ने मुझे सताया है,
ना की ना सुनो तो कहेंगे कल, "बेटा हमने पहले ही कहा था",
और गर हाँ की न सुनो तो कहेंगे "तू कहता बहुत है।"

कोई कहता साथ हैं हम तेरे, तो कोई अकेले मरने की देता दुआ,
अगर साथ मिल जाये इस नयी जंग में किसी का,
तो हम खुश किस्मत हैं,



Wednesday, December 12, 2012

पहाड़ों की पुकार


भरे पन्नों और किताबों की जरूरत नहीं है,
बस एक शब्द बन जाये, जो कारवां हिला दे,
लाखों हजारों मशालों का क्या करूँ मैं,
एक चिंगारी बहुत है, जो सब को जला दे।
ये पहाड़ों की धरती आज कुछ कह रही है
खुद भी समझ ले और सब को सुना दे।


मेरे आँचल में खुशियाँ क्या कम हैं?
जो भटकता है तू दर-ब-दर,
खेत में उग जाएँ हीरे, और जंगल में मोती,
थोड़ी से जान ले गर तू कदर
ये पहाड़ों की धरती आज कुछ कह रही है
खुद भी समझ ले और सब को सुना दे।

Sunday, December 18, 2011

वो हर वक्त तुझे सोचता है,

वो हर वक्त तुझे सोचता है,
वो हर पल तुझे चाहता है
क्यों नहीं लौट जाता तू पास उसके,
जो सोचता है की तू हर वक्त क्या सोचता है|

वो चाहता है तुम्हे इतना,
जैसे हर प्यासा बरसात चाहता है|
अँधेरे में, किसी बेबस की तरह,
बस तेरा साथ चाहता है|



एक बार सोच ले तू,
वो तुजे  बार बार सोचता है|
तेरे नफरतों के समुंदर में
अश्क-ए-प्यार ढूंढ़ता है|
....................................................to be continued