Sunday, December 18, 2011

वो हर वक्त तुझे सोचता है,

वो हर वक्त तुझे सोचता है,
वो हर पल तुझे चाहता है
क्यों नहीं लौट जाता तू पास उसके,
जो सोचता है की तू हर वक्त क्या सोचता है|

वो चाहता है तुम्हे इतना,
जैसे हर प्यासा बरसात चाहता है|
अँधेरे में, किसी बेबस की तरह,
बस तेरा साथ चाहता है|



एक बार सोच ले तू,
वो तुजे  बार बार सोचता है|
तेरे नफरतों के समुंदर में
अश्क-ए-प्यार ढूंढ़ता है|
....................................................to be continued

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