तेज चुभती धुप में, ठंडी छांव के शुकून में,
चिडियों की चहकती सुबह और ढलती शाम में|
हर लम्हा तेरी सांसो की तरह, तेरे साथ हूँ मैं|
देख ले कभी मन की नजर से, याद हूँ मैं||
पुकार पे तेरी कभी मैं, आवूंगी नहीं,
रूठ जाने से तेरी कभी जवूंगी नहीं|
खो दिया गर तुने सब कुछ तो क्या,
तेरे कल को लिए तेर साथ हूँ मैं|
देख ले कभी मन की नजर से, याद हूँ मैं||
तेरे गम के सागर में भी तुजे हंसा दूँगी,
हंसती खुशियों में गम के आंशु ला दूँगी|
गर टूट गए सारे आईने तो क्या,
उसकी तस्वीर लिए आज तेरे साथ हूँ मैं|
देख ले कभी मन की नजर से, याद हूँ मैं||
Wednesday, March 9, 2011
याद हूँ मैं
2:50 AM
No comments
Subscribe to:
Post Comments (Atom)







0 comments:
Post a Comment